Thursday, April 2, 2009

(1) ME AND MY RELIGIOUS VIEW


HARSH WROTE...........

मेरे लिए ईश्वर अपने अंदर की आवाज है - वह पराशक्ति जिसके प्रति हमें नतमस्तक होना चाहिए।
मैं ईश्वर की रोज प्रार्थना करता हूं पर मैं किसी भी तरह से परंपरावादी नहीं हूं। मैं किसी खास मंत्र का उच्चारण नहीं करता , न ही किसी खास तरह से प्रार्थना करता हूं। मैं तो ईश्वर से सिर्फ बातें करता हूं , वैसे ही जैसे किसी मित्र से! मैं उसे अपने दिन भर की बातें बताता हूं और धन्यवाद देता हूं उस सबके लिए जो उसने मुझे दिया है। मैं किसी चीज को सौभाग्यशाली या दुर्भाग्यशाली नहीं मानता , न ही कोई ताबीज पहनता हूं। मैं इन सबसे दूर ही रहता हूं क्योंकि जैसे ही आप इस सबमें भरोसा करने लगते हैं , आप एक तरह से उन्हीं पर निर्भर हो जाते हैं.

मैं खुद को कोई आध्यात्मिक व्यक्ति नहीं समझता। मैं मानता हूं कि आध्यात्मिकता एक कोड ऑफ कंडक्ट है जो आप खुद के लिए तय करते हैं। भले ही मैं आध्यात्मिक व्यक्ति नहीं हूं , फिर भी मैं मानता हूं कि अगर मैं नेक और सही तरीके से अपना काम कर रहा हूं तो मैं ईश्वर के रास्ते पर चल रहा हूं। मैं ईश्वर में भरोसा रखता हूं। ईश्वर मेरे लिए एक महाशक्ति है जिससे आप ताकत पाते हैं। ईश्वर से मेरा रिश्ता व्यक्तिगत , आमने - सामने का है। प्रार्थना करता हूं परंतु मैं ईश्वर से संवाद बनाने के लिए लंबे - चौड़े कर्मकांड निबाहने में भरोसा नहीं रखता। प्रार्थना अपने अंदर की आवाज़ से जुड़ने जैसा है।बुरे या संकट के समय में इस महाशक्ति की ओर मुड़ने की बजाय , मैं अंदर , अपनी ओर मुड़ता हूं और अंदर से ताकत बटोरने की कोशिश करता हूं।

वैसे भी जब जीवन में कुछ गलत होने लगे तो ईश्वर में भरोसा खोना नहीं चाहिए। मैं संकट से बाहर निकलने के लिए स्व-विवेचना (सेल्फ टॉक) करता हूं , पर भविष्य के बारे में भूलकर वर्तमान में जीना मेरे लिए सबसे मददगार साबित होता है।
ईश्वर पर भरोसा आपको अभिमानरहित , विनीत बनाए रखता है और विपरीत परिस्थितियों में भी आपको आधार दिए रहता है। अगर आप जीवन में कुछ कर दिखाना चाहते हैं तो आपको ईश्वर और उसकी इच्छा पर भरोसा होना चाहिए। ईश्वर में भरोसा आपकी मदद ही करता है , कभी चोट नहीं पहुंचाता।

--- HARSH CHAUDHARY

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