Monday, April 6, 2009

(3) टूटते रिश्ते...?



MY VIEW ON RELATION.....
भारत ऐसा देश रहा है जहां सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को विशेष महत्व दिया जाता रहा है । रिश्तों की आत्मीयता भारतीय संस्कृति मे बसी है । भारतवासियों को सदैव रिश्ते निभाने की गौरवशाली परंपरा पर गर्व रहा है । लेकिन पिछले कुछ समय से स्थितियां बदली है । भौतिकतावाद, नैतिक मूल्यों के पतन, संयुक्त परिवार के विघटन और नए महत्वाकांक्षाओं ने व्यक्ति की मानसिकता को प्रभावित किया है । यही वजह है रिश्तों की आत्मीयता में जो गरमाहट थी, कम होने लगी है ।मुझे लगता है कि रिश्तों को निभाना एक चुनौती है, जिसको हर कोई आदमी नहीं निभा सकता ! बागवान फिल्म में रिश्तों में आ रहे इस बदलाव को art के साथ परदे पर उतारा गया है ।

संयुक्त परिवार एक वृक्ष की तरह होता है, जिसकी छाँव में हर छोटे-बड़े रिश्ते फलते-फूलते हैं। परंतु कभी-कभी इस बरगद की कुछ शाखाएँ इतनी अधिक बड़ी हो जाती हैं कि वो उस पेड़ से टूटकर अलग हो जाती हैं व अपना अस्तित्व खोती जाती हैं। यही कुछ रिश्तों के साथ भी होता है। रिश्तों का आनंद भी संयुक्त परिवार में ही है। रिश्ते धागों के समान होते हैं। जो सालों में प्रगाढ़ होते हैं और एक छोटी सी गलती से पलभर में टूटकर बिखर जाते हैं।

जाने क्यूं जब भी रिश्तों को टूटते देखता हूं तो सोचता हूं मैं अपने जीवन में किसी भी रिश्ते को टूटने नहीं दूंगा। इसके लिए मुझे कितना भी दर्द क्यों न सहना पड़े। टूटते रिश्तों को महसूस करने के बाद जाने क्यों रिश्तों को निभाने के लिए तत्पर हो उठता हू सच कहूं तो वहीं लोग रिश्तों को निर्दयता से तोड़ते हैं जिन्हें रिश्तों की समझ नहीं होती और उनसे मिलने वाले प्यार के अहसास को वह अनुभव नहीं कर पाते। वरना कौन ठेस पहुंचाना चाहेगा। इसके पीछे अकसर तर्क ढूंढता हूं कि ऐसे क्या कारण होते हैं कि जिन्हें छोड़ देने के बजाये लोग रिश्ता तोड़ हैं।
अच्छा है कि जिनकी याद में कल तड़पना पड़े उन्हें आज ही जाने से रोक लिया जाए। वरना समय फिर नहीं लौटना और न ही वह जिसे खो दिया है।

रिश्ते टूटतेहैं तब बहुत दर्द होता है। आशा से निराशा का यह time बहुत ही तकलीफों भरा होता है। दर्द और आँसू मिलने से पहले ही वक्त रहते यदि समझदारी से काम लिया जाए तो रिश्तों की यह डोर मजबूत बनी रह सकती है।
Following facts may save the relationship:-
बातचीत मत करो बंद :-
याद रखें बातचीत बंद करने से रिश्तों में प्यार भी खत्म हो जाता है और रह जाती है तो बस औपचारिकता, जो हमें बेमन से रिश्ते को निभाने पर मजबूर करती है। यदि मनमुटाव से बचना है तो अपने मन की बात को शब्दों में बयाँ कर दीजिए। इससे आपके झगड़े जल्दी ही सुलझ जाएँगे।
रिश्तों की गरिमा को बनाए रखें :-
नए रिश्ते को बनाने के चक्कर में पुराने रिश्तों की आहुति न दें और भूलकर भी ऐसा कार्य न करें। जिससे आपके रिश्तों की गरिमा को ठेस पहुँचे। रिश्ते बनाना तो आसान होते है परंतु निभाना बेहद मुश्किल।
-- HARSH CHAUDHARY